बिहार विधान परिषद् सभागार में रानी अब्बक्का की संगोष्ठी का आयोजन प्रोफ़ेसर पूनम सिंह प्रांत संयोजिका महिला समन्वय समिति के द्वारा किया गया। रानी अब्बक्का की 500 वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन किया गया रानी अब्बक्का चौटा (16वीं शताब्दी) तटीय कर्नाटक के उल्लाल की पहली तुलुवा रानी और एक निडर योद्धा थीं, जिन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक पुर्तगाली औपनिवेशिक आक्रमणों को विफल किया। अपनी बहादुरी के कारण “अभय रानी” (निडर रानी) के रूप में प्रसिद्ध, वे भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक मानी जाती हैं।प्रोफ़ेसर पूनम सिंह प्रांत संयोजिका महिला समन्वय समिति ने महिलाओं को संबोधित करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय नारी जो त्याग , और समर्पण संस्कार की प्रतिमूर्ति जानी जाती थी वहां हमारा भारत किस ओर जा रहा है,तरह-तरह की घटनाएं हो रही है, अपने भारत को सुदृढ़ और सुसंस्कृत बनाने हेतु अपने इतिहास को जानने हेतु आज इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया है ताकि महिलाएं अपने अधिकारों के साथ ही कर्तव्यों का सामंजस्य स्थापित कर सके जिससे भारत पुनः अपने गौरवशाली वैभव को प्राप्त कर सके।
मुख्य वक्ता किरण घई ने कहा
भारत माता की जय कहते हुए धरती की वंदना करते हुए अपने वक्तय देते हुए कहा कि वीरता पराक्रम और रानी अबक्का की 500वी मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं देश विशेष परिस्थिति में खड़ा है, महिला अधिकार की बात करते हैं, मातृ शक्ति को आगे आना होगा लोकतंत्र पर संकट है भीतरी भी है और बाहरी भी है, लेकिन हम तो गंगा के तट के हैं प्रदूषण को खत्म कर देंगे ब्रह्म तत्व से उनको खत्म करते हैं, भारतीय इतिहास ने रानी अबक्का को भुला दिया गया, रानी अबक्का शाही परिवार में जन्मी, उनको राज सत्ता संभालने का मौका मिला, मैं अभिभूत हूं रानी के पराक्रम से, पुर्तगालियों ने टैक्स मांगा जिसका उन्होंने अवहेलना की और उन्होंने उनका बड़े उत्साह और पराक्रम से सामना किया। उन्होंने 200 सैनिकों को लेके हजारों सैनिकों से सामना किया। अपने जीवन के आहुति और समर्पण करने वाले को पूरा देश जाने ये बहुत आवश्यक है। उन्होंने अग्निबाण बरसा कर पुर्तगालियों का सामना किया। कई स्त्री सेना बनाई थी, समाज से अवसर प्राप्त होना चाहिए कि स्त्री सशक्त हो। गठबन्धन की राजनीति की उन्होंने, बीजापुर के प्रशासक और केरल के राजा को सहयोग लिया। वंदनीय है रानी अबक्का जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। मातृत्व की शक्ति बनाए रखें, अपनी संस्कृति को बनाए रखें और विकास के स्वपन को आगे लेके चलें।
मैथिली ठाकुर विशिष्ट अतिथि ने अपने वक्तव्य में कहा कि अपने जीवन में संगीत और संस्कृति को लेके आगे बढ़ी हूं, एकजुटता में बड़ी ताकत है। अपनी जीवन के बारे में बताते हुए संस्कार और शिक्षा की बात की, फिर विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, ब्रह्म तत्व के जरिए नकारात्मक चीज़ों को कैसे हटाया जाए ये किरण घई दीदी से सीखने को मिला। संगीत ने मुझे भावनाओं को समझना सिखाया और अपने सुरों के माध्यम से अपनी संस्कृति को गाउं, अपने धर्म और सनातन अपनाई जाए, पाश्चात्य संस्कृति को त्याग करना चाहिए। सशक्त महिलाओं के बीच सशक्त होने का मौका मिला के द्वारा गायन प्रस्तुत किया गया
माननीय सुनीता हल्देकर जी के द्वारा महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा गया कि ऋषि अरविन्द जी कहते हैं कि जो समाज पुरुषार्थ के साथ खड़ा रहता है
स्वामी विवेकानंद जी ने भारत भ्रमण करते हुए विदेशों की यात्रा से लौटे तो बताई कि भारत में संगठनों की आवश्यकता है, कुछ समय के लिए देव देवताओं को भूल कर अपनी भारतमाता को आत्मसात करें। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से समानार्थशाली हिन्दू समाज गठित होने का कार्य किया गया। राष्ट सेविका को 90 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। महिलाओं को अपनी संस्कृति और सभ्यता को लेकर चलना होगा। महिलाओं को आपस में समन्वय का कार्य महाराष्ट्र से शुरू हुआ। महिलाओं में जागृत करने का कार्य किया जाने लगा।राजकुमार जी महिला समन्वय के दक्षिण बिहार प्रांत के संघचालक के द्वारा उद्बोधन करते हुए कहा गया कि हमें अमेरिका जैसा बड़ा देश नहीं चाहिए हमें अपने देश में राम राज्य चाहिए। संघ यही चाहता है कि धर्म मार्ग पर चलते हुए हमारी भारतमाता संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शन कर रही है।जब भारतीय शक्ति जागृत होती है, तो केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा राष्ट्र आगे बढ़ता है।
और जिस दिन यह शक्ति पूर्ण रूप से जागेगी, उस दिन भारत अपने विकास और गौरव के सर्वोच्च शिखर पर होगा।
महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ ही अपनी गरिमामयी विरासत से अवगत कराने के पावन उद्देश्य से इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों एवं सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता रही।