April 18, 2026

Maya shrivtastav

बंगलौर —- सरजापुर जब कानून बनाने वाले ही हो अपराधी तो न्याय की उम्मीद किससे करें —- माया श्रीवास्तव बंगलौर के सरजापुर में समर्थ नारी समर्थ भारत के कार्यक्रम में समर्थ नारी समर्थ भारत की राष्ट्रीय सह संयोजिका , बिहार, झारखंड एवं वेस्ट बंगाल की प्रभारी श्रीमती माया श्रीवास्तव ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी अब सिर्फ बातों का सहारा लेना बंद कीजिए अब समय आ गया है अपनी कथनी और करनी में समानता लाए।हाल ही में भाजपा शासित बिहार में वहां के मुख्यमंत्री द्वारा मंच पर एक नवोदित डॉक्टर का हिजाब खींचा गया, पर आजतक मोदी जी अपने गठबंधन के इस मुख्यमंत्री को कुछ कहे नहीं साथ ही इस शर्मनाक मामले पर मोदी जी का कोई व्यान भी नहीं आया तो, हम महिलाएं महिलाएं मोदी अपनी सुरक्षा की उम्मीद कैसे करें ? जबकि हम महिलाओं के करना एन डी ए की सरकार बनती है. आपको याद होगा 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के कुछ ही दिनों बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 2012 में चलती बस में एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था उस महिला के माता पिता को आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देगी , जिस घटना के कारण व्यापक आक्रोश फैल गया था ।हालांकि आपके शब्दों से और आपके कार्यों में कोई मेल नहीं खाता और इसके अंगिनत उदाहरण इस बात के समर्थन करते हैं 2020 में उत्तरप्रदेश के हाथरस कस्बे की घटना जहां भाजपा शासन है महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए कुख्यात है जहां एक दलित महिला के साथ बेरहमी से सामूहिक बलात्कार किया गया बाद में चोट के कारण मृत्यु हो गई, और शासन प्रशासन उच्चाधिकारियों ने मिलकर उसकी शव को अपने अधिकार में जा लेलिया और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया ,और परिवार बालों को अंतिम विदाई भी नहीं करने का अधिकार तक नहीं दिया जिसका बहाना कानून व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए बनाया गया था। और भी बहुत कुछ है ।2023में दो ओलंपिक गेम विजेताओं एशियाई गेम्स चैंपियन्या सहित कई प्रमुख पहलवानों नेभाजपा सांसद ब्रिज भूषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था,यौन उत्पीड़न का आरोप था। मामले की जांच और उनकी गिरफ्तारी मांग थी आरोपों की गंभीरता के बावजूद मोदी ने महिला पहलवान को सार्वजनिक रूप से समर्थन और न न्याय का आश्वासन ही दिया ।श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा ऐसी महिला उत्पीड़न और बलात्कार की कितनी घटनाएं है शायद आपको याद होगा मणिपुर में बीजेपी की शासन व्यवस्था है 4 मई को मणिपुर के एक गांव में भीड़ ने कुकी समुदाय तीन महिला निर्वस्त्र के घुमाया और कथित तौर पर एक के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया इसका वीडियो वायरल हुआ वो जग जाहिर ही , है इस घटना के कुछ ही दिन बाद बलात्कार की और भी घटनाओं की खबरें सामने आई ।मदर्स ऑफ मणिपुर से जानी जाने वाली महिलाओं केएक समूह द्वारा चार हथियारबंद पुरुषों को सौंपे जाने के बाद एक 18 साल की महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया। वीडियो के वायरल होने के बाद जारी हिंसा को लेकर चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने की धमकी दी ।भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार की निष्क्रियता की आलोचना की और कहा कि यदि सरकार तत्काल कार्रवाई करने में विफल रही तो अदालत हस्तक्षेप करेगी ।इस परेशान करने वाले वीडियो को वायरल होने और उसके बाद हुए तीव्र आक्रोश ने बयान देने के लिए मजबूर कर दिया।मोदी ने अपने बयान में कहा मणिपुर राज्य में महिलाओं के साथ हुए बलात्कार की निंदा करते हुए इसे शर्मनाक बताया और कड़ी कार्रवाई की वादा किया । लेकिन हुआ क्या पीड़िता को न्याय मिला क्या ?,,,ऐसी महिला उत्पीड़न की कितनी ही घटनाएं घटती है जो बीजेपी शासित प्रदेशों में है उतराखंड यूपी दिल्ली जैसे अनेकों राज्यों में है सरकार तो हस्तक्षेप करती नहीं बार बार सर्वोच्च्य न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता है ।जैसे अभी तत्काल की घटना को लीजिए न सेंगर का केश ,। दूसरे राज्यों में भी महीला उत्पीड़न की घटनाएं घट रही है लेकिन न्याय नहीं मिलता ।तत्कालीन सरकार में न केबल लोकतन्त्र बल्कि महिलाओं के अधिकारों सहित मानवाधिकारों का बार बार उलंघन हुआ है और हो रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने वाले कई भाषणों के बावजूद ,सरकार ने महिलाओं के प्रति सहानुभूति और न्याय का रास्ता तो दिखाते हैं लेकिन उस पर खड़े नहीं उतरते हैं। एक तरफ तो महिलाओं की उत्पीड़न की घटनाएं नहीं रुक रही है और महिला सुरक्षा की बहस चल रही है देश भर में बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ के नारे गूंजते हैं। एक तरफ देश के बड़बोले माननीय प्रधानमंत्री और के राजनीतिक दल महिला सुरक्षा और विकास और न्याय की बात करते हैं दूसरी तरफ आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों को टिकट दे कर विधान सभा और लोक सभा राज्य भेजते हैं । ऐसा नहीं है कि ऐसे जनप्रतिनिधि हाल ही में राजनीतिक में आएं है । यह धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा है , शीर्ष पर बैठे हुए सत्ताधारी आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों से न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं , यह राजनीतिक दलों का पाखंड है।उन्हें तो शर्म से सर झुक जानी चाहिए कि 2014से लेकर 2025में भी ऐसी घटनाएं घट रही हैं । अगर इसी तरह से चलता रहा तो 2026 में महिलाओं को रास्ते पर भी चलना मुश्किल हो जाएगा।श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा ये कैसी कानून व्यवस्था है जिन विधायकों और सांसदों के खिलाफ महिला उत्पीड़न अपराध दर्ज है उनकी संख्या काफी बड़ी है फिर शीर्ष पर बैठे नेता उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं ।ये तो चिंता का विषय है ।तत्कालीन सरकार के तहत महिलाओं के साथ किए जाने बाला व्यवहार बेहद चिंताजनक है और यह महिलाओं के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देने के वादों के विपरीत है। यह उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस सरकार शासनकाल में मोदी जी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर चुप्पी को लेकर सवाल अक्सर उनकी आलचना किया करते थे।मौजूद हालत मोदी की मौजूदा चुप्पी पर सवाल खड़े करते हैं ।सच्च तो यह है निष्क्रियता कथनी से कहीं अधिक मुखर है,और यह स्पष्ट है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने में रुचि नहीं रखती है। श्रीमती श्रीवास्तव ने महिलाओं से आग्रह किया कि महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए. जब देश में बार बार सर्वोच्च न्यायालय को ही हस्तक्षेप करनी है तो मोदी जी जेसे तत्कालीन प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए. कार्यक्रम की अध्यक्षता सुमन पटवारी संचालन रुचिका जैन, धन्यवाद ज्ञापन स्वर्णलता ने किया ।इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं आशा मजुमदार,बिना राठौड़,लतिका झुनझुनवाला,इंद्राणी प्रिया झुंझुवाला,सुजाता राठौड़,खुशबू नागर रश्मि अग्रवाल,विंदु कारण,अमृता धारीवाल,रानी मोदी, गीता नगर, लीना सिंहा,कविता जोशी,सरोज जायसवाल, इत्यादि मौजूद रही।