
इंदिरा आईवीएफ पटना में विश्व आईवीएफ दिवस और भ्रूण वैज्ञानिक दिवस का आयोजन
मुख्य अतिथि श्रीमती अप्सरा मिश्रा अध्यक्षा“बिहार राज्य महिला आयोग”
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जदयू एजुकेशन सेल के राज्य उपाध्यक्ष डॉ श्री रणधीर कुमार मिश्रा और डॉ रजनीश रंजन शामिल हुए।
पटना: इंदिरा आईवीएफ पटना में आज विश्व आईवीएफ दिवस और भ्रूण वैज्ञानिक (Embryologist) दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दिन दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुईस ब्राउन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिसने निःसंतानता के इलाज में एक नई क्रांति की शुरुआत की थी।
मुख्य अतिथि श्रीमती अप्सरा मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा, “बिहार राज्य महिला आयोग महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रजनन अधिकारों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। आईवीएफ तकनीक को पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में हम सभी प्रयासरत हैं। इंदिरा आईवीएफ की टीम इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे इंदिरा आईवीएफ के सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं बिहार हेड डॉ. दयानिधि कुमार ने आईवीएफ के इतिहास, तकनीकी प्रक्रिया एवं समाज में इसके बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला।
इंदिरा आईवीएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री नितिज मुरडिया ने कहा, “यह दिन न सिर्फ चिकित्सा तकनीक की सफलता का उत्सव है, बल्कि उन दंपतियों के लिए भी आशा का प्रतीक है जिन्होंने आईवीएफ के माध्यम से मातृत्व-पितृत्व का सुख पाया है। हम वैज्ञानिक अनुसंधान और नैतिक उपचार के साथ समाज को नई दिशा देने के लिए संकल्पित हैं।”
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जदयू एजुकेशन सेल के राज्य उपाध्यक्ष डॉ श्री रणधीर कुमार मिश्रा और डॉ रजनीश रंजन, यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ,बिहार राज्य के उपाध्यक्ष श्री सुधीर मधुकर शामिल हुए।
इस अवसर पर डॉ. सुनिता कुमारी (क्लिनिकल हेड), डॉ. रीना रानी (इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट) और डॉ. ऋतिका प्रकाश (फीटल मेडिसिन एक्सपर्ट) ने अतिथियों का स्वागत किया और आईवीएफ के प्रति समाज को जागरूक करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अशोक वृक्ष में जल अर्पण कर की गई। इसके बाद आईवीएफ मरीजों को पौधे वितरित किए गए और आईवीएफ बेबीज़ को उपहार भेंट किए गए। साथ ही सभी डॉक्टर्स और भ्रूण वैज्ञानिकों (Embryologists) का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य आईवीएफ तकनीक, उसके नवाचार एवं जनसामान्य के लिए उपलब्ध सेवाओं के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना और उम्मीदों को नई दिशा देना था।