सूत्रधार ने मनाई भिखारी ठाकुर की 137वीं जयंती, लघु नाट्य की हुई प्रस्तुति
■ आमजन तक पहुंचे भिखारी ठाकुर की विचारधारा : अनीश अंकुर
खगौल। सांस्कृतिक एवं नाट्य संस्था “सूत्रधार” द्वारा महान लोक नाटककार, कलाकार और गायक भिखारी ठाकुर की 137वीं जयंती के अवसर पर लघु नाट्य प्रस्तुति, लोकगायन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत भिखारी ठाकुर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए की गई।साथ ही “भिखारी ठाकुर के नाटकों के पात्रों के नाम और उनके निहितार्थ” विषय पर परिचर्चा नवाब आलम की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस अवसर पर भिखारी ठाकुर लिखित नाटकों की लघु नाट्य प्रस्तुति रंगकर्मी अनिल कुमार ‘सुमन’ द्वारा की गई साथ ही वरिष्ठ लोक कलाकार अखिलेश सिंह एवं युवा कलाकार संजय यादव द्वारा लोक गीत की प्रस्तुति की गई।
उपरोक्त परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी अनीश अंकुर ने कई उदाहरण देते हुए बताया “भिखारी ठाकुर ने समाज के सबसे निचले तबके को पात्र बनाया।अब जैसे नाम को देखें। बिदेसी, चेथरू,उपद्दर,गलीज,भलेहू, उदवास,चपाटराम आदि। महापंडित राहुल सांकृत्यायान ने उन्हें ‘अनगढ़ हीरा’ कहा है।जबकि बिहार सरकार के शिक्षा सचिव व नाटककार जगदीश चंद्र माथुर ने उन्हें ‘भरत मुनि का वंशज’। जगदीश चंद्र माथुर ने यह लिखा है कि जिंदगी में उन्हें एक से बढ़कर एक कलाकार से मिलने का मौका मिला पर ऑटोग्राफ सिर्फ भिखारी ठाकुर का लिया था। उनका नाटक बिदेसिया आज पलायन की परिघटना का प्रतीक बन चुका है। भिखारी ठाकुर को पिछड़ा-दलित खांचे में रखकर नहीं रखा जा सकता।’बेटी बेचवा’ के मंचन के बाद लड़कियां वृद्ध पुरुषों से विवाह करने के बजाए घर से भाग अपनी पसंद के लड़के से विवाह करने लगी थी। उन पर अब बहुत सारे शोध होने लगे हैं। कई कई आयाम उभर कर आने लगे हैं। रंगकर्मी उदय कुमार ने कहा कि ” उनके नाटकों के पात्र समाज के वंचित समाज से जुड़े रहते थे। वो समय के अनुकूल संवाद गढ़ने में माहिर थे। वो अपने पात्रों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं को अपने नाटकों में रखते थे। वरिष्ठ निर्देशक रामनारायण पाठक ने कहा “भिखारी ठाकुर के नाटकों के पात्र उनकी कथा को सजीव कर देते हैं। पात्रों के नाम एकदम ग्रामीण संस्कृति से जुड़े और लोक रंजक होते हैं। संस्कृतिकर्मी विनोद शंकर मिश्र,रंगकर्मी जयप्रकाश मिश्र, अरुण सिंह पिंटू आदि ने कहा कि उनके नाटकों के चरित्रों के नाम सहज और लोक भाषक होते हैं।
भिखारी ठाकुर के नाटकों में पात्रों के नाम बिल्कुल गंवई हैं जिससे उनकी कथा से आम आदमी अपने को जुड़ा समझता है और कहानी आमजन को अंदर से झकझोर देने में सफल होती है। गोष्ठी को बीरेंद्र कुमार,सुजीत कुमार, विश्व मोहन चौधरी संत ने भी संबोधित किया।
नाटक से पूर्व आगत अतिथियों का स्वागत संस्था के महासचिव एवं वरिष्ठ रंग निर्देशक नवाब आलम ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण और महिलाओं की मुक्ति की बात की शुरुआत अगर हम करेंगे तो उसकी शुरुआत हमें भिखारी ठाकुर की रचनाओं से करना होगा।
मौके पर पत्रकार सुधीर मधुकर, सामाजिक कार्यकर्ता चंदू प्रिन्स, पवन कुमार,अनिल कुमार सिंह, पृथ्वी राज पासवान,बीरेंद्र कुमार, , रोहित कुमार,नवीन कुमार मो सज्जाद, संजय कुमार गुप्ता, शोएब कुरैशी, शमशाद अनवर, महेश चौधरी, संजय यादव, अखिलेश सिंह,प्रेम,आशुतोष श्रीवास्तव विकास पप्पू , भोला, राजीव त्रिपाठी,आसिफ सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
